सब्र की साधना ही जीवन को संपूर्ण बनाने की कुंजी
सब्र की साधना जीवन को संपूर्ण बनाने की कुंजी मनुष्य का जीवन अनेक इच्छाओं, आकांक्षाओं और संघर्षों से भरा हुआ है। हम सब चाहते हैं कि हमारी हर कामना तुरंत पूरी हो जाए, हर प्रयास का फल शीघ्र मिल जाए और हर परिस्थिति हमारे अनुकूल बन जाए। लेकिन जीवन का सत्य यह है कि प्रकृति की गति धैर्य और समय के नियमों पर चलती है। इसी सत्य को अत्यंत सरल किन्तु गहन शब्दों में व्यक्त करते हुए आचार्य निखिल कहते हैं— “सब से सब्र तो नहीं होता… पर सब्र से सब कुछ होता है।” आचार्य निखिल जब यह वाक्य कहते हैं, तो उनकी मनःस्थिति केवल उपदेश देने वाले गुरु की नहीं होती, बल्कि जीवन के अनुभवों से परिपक्व हुए एक ऐसे साधक की होती है जिसने मानव स्वभाव की अधीरता को भी देखा है और धैर्य की शक्ति को भी समझा है। वे जानते हैं कि मनुष्य का मन अत्यंत चंचल है। मन तुरंत परिणाम चाहता है, वह प्रतीक्षा को बोझ समझता है। इसलिए वे पहले ही स्वीकार कर लेते हैं कि “सब से सब्र नहीं होता।” यह स्वीकारोक्ति किसी निराशा की नहीं बल्कि मानव स्वभाव की यथार्थ समझ की अभिव्यक्ति है। मनुष्य अक्सर परिस्थितियों से हार नहीं मानता, बल्कि अपनी अधीरता से हा...