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Showing posts from May, 2026

व्याख्यान

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व्याख्यान स्त्री का अंतर्मन: प्रेम और क्रोध का गहरा रिश्ता वक्ता: डॉ. दक्षा जोशी 'निर्झरा' स्थानीय संपादिका, उलझन सुलझन, महिला प्रकोष्ठ अहमदाबाद (गुजरात) आदरणीय उपस्थित सज्जनो, मातृशक्ति, बहनो एवं प्रिय साथियो, आज मैं आप सबके सामने एक ऐसे विषय पर अपने विचार साझा करने के लिए उपस्थित हूँ, जो जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही गहरा और संवेदनशील है—“स्त्री का अंतर्मन: प्रेम और क्रोध का गहरा रिश्ता।” अक्सर हम यह मान लेते हैं कि प्रेम और क्रोध दो विपरीत भावनाएँ हैं। हमें लगता है कि जहाँ प्रेम होगा, वहाँ शिकायत, रूठना या क्रोध नहीं होना चाहिए। लेकिन यदि हम स्त्री के मन को थोड़ा ठहरकर समझने का प्रयास करें, तो पाएँगे कि उसका क्रोध कई बार उसके प्रेम की ही एक गहरी अभिव्यक्ति होता है। स्त्री का मन अत्यंत संवेदनशील होता है। वह संबंधों को केवल निभाती नहीं, बल्कि उन्हें अपने भावनात्मक संसार में जीती है। यही कारण है कि वह उसी व्यक्ति से सबसे अधिक क्रोधित होती है, जिसे वह सबसे अधिक अपना मानती है। जिस व्यक्ति से मन का जुड़ाव ही न हो, उसके व्यवहार का असर भी बहुत कम होता है। अब प्रश्न उठता है कि स्...

प्रार्थना (लघुकथा)

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प्रार्थना प्राचीन समय की बात है रामलाल नामक व्यापारी अनाज तथा अन्य सामान गाड़ी में डालकर शहर लेकर जा रहा था। रास्ते में गाड़ी का पहिया कीचड़ में धंस गया। व्यापारी उस ओर से जाने वाले हर व्यक्ति से मदद की पुकार करने लगा, लेकिन कोई भी व्यक्ति मदद को नहीं आया।  अंत में उसने अपने मन में एक निश्चय किया और उस पहिये को अकेले ही निकालने की कोशिश करने लगा लेकिन पहिया नहीं निकल पा रहा था। वह बेचैन हो इधर-उधर देखने लगा। आँखों से अश्रु बहने लगे।  प्रार्थना कर उसने फिर से कोशिश की तो पहिया निकल गया उसने पीछे मुड़कर देखा तो एक बलवान व्यक्ति उसके साथ कंधा से कंधा मिलाकर पहिया उठा रहा है इसलिए पहिये का निकल पाना संभव हुआ। व्यापारी ने उसे हृदय से धन्यवाद दिया । सार मन से की गई प्रार्थना सुनकर ईश्वर किसी न किसी को प्रेरित कर सहायता के लिए भेज देता है। रचनाकार सुलोचना धनावत स्थानीय सम्पादिका  उलझन सुलझन (लेडीज विंग) नागपुर (महाराष्ट्र) प्रस्तुति