प्रार्थना (लघुकथा)

प्रार्थना

प्राचीन समय की बात है रामलाल नामक व्यापारी अनाज तथा अन्य सामान गाड़ी में डालकर शहर लेकर जा रहा था। रास्ते में गाड़ी का पहिया कीचड़ में धंस गया। व्यापारी उस ओर से जाने वाले हर व्यक्ति से मदद की पुकार करने लगा, लेकिन कोई भी व्यक्ति मदद को नहीं आया। 

अंत में उसने अपने मन में एक निश्चय किया और उस पहिये को अकेले ही निकालने की कोशिश करने लगा लेकिन पहिया नहीं निकल पा रहा था। वह बेचैन हो इधर-उधर देखने लगा। आँखों से अश्रु बहने लगे। 

प्रार्थना कर उसने फिर से कोशिश की तो पहिया निकल गया उसने पीछे मुड़कर देखा तो एक बलवान व्यक्ति उसके साथ कंधा से कंधा मिलाकर पहिया उठा रहा है इसलिए पहिये का निकल पाना संभव हुआ। व्यापारी ने उसे हृदय से धन्यवाद दिया ।

सार

मन से की गई प्रार्थना सुनकर ईश्वर किसी न किसी को प्रेरित कर सहायता के लिए भेज देता है।

रचनाकार


सुलोचना धनावत
स्थानीय सम्पादिका 
उलझन सुलझन (लेडीज विंग)
नागपुर (महाराष्ट्र)
प्रस्तुति

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